Friday, 22 July 2011

अहंकारः एक नशा


         क्रोध का शीर्षासन मान है| व्यक्ति अधिकार चाहता है| जब अधिकार की प्राप्ति नहीं होती, उसी समय क्रोध उत्पन्न होता है और अधिकार की प्राप्ति होने पर अहंकार अर्थात् मान की उत्पत्ति हो जाती है| अपेक्षा की उपेक्षा से क्रोध और अपेक्षा की पूर्णता मान है| जितने अपराध क्रोध से नहीं होते उतने मान से होते पाये गये हैं| रावण ने मान की पूर्ति के लिये सीता को अपने पास रखा और युद्ध किया| अहंकार के कारण रामायण का युद्ध हुआ|
         शराब केवल मुख से सेवन की जाती है, किन्तु अहंकाररूपी शराब को तो शरीर का जर्रा-जर्रा पीता है| शराब के नशे से तो मनुष्य तो नाली में ही गिरता है, किन्तु मानरूपी शराब पीने पर होने वाला नशा नरक, निगोद में ही गिराता है| शराब पीने वाले कहीं-कहीं पाये जाते हैं, किन्तु मानरूपी शराब पीने वाले सर्वत्र पाये जाते हैं| सभी काल में पाये जाते हैं| अतः मान को छोड़ कर कोमलता अपनानी चाहिये|

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