Wednesday, 10 August 2011

णमोकारमन्त्र का महत्त्व

   णमोकारमन्त्र आत्मविकास के प्रशस्त मार्ग को अपनाने के लिये प्रेरणास्रोत का कार्य करता है| यह अभ्युदय और निःश्रेयस का प्रसाधक है| ऐहिकदृष्टि हो या पारलौकिक, समस्त दृष्टियों से णमोकारमन्त्र हित का सम्पादक है| अज्ञान एवं अहंमन्यता के आग्रह को मिटाने के लिये यह मन्त्र अति-अनिवार्य है|
  णमोकारमन्त्र का स्मरण करने से समस्त अमंगल दूर हो जाते हैं, अनेक प्रकार की ॠद्धि-सिद्धियॉं उपलब्ध होती हैं तथा मुक्त होने का सुलभ अवलम्बन प्राप्त होता है| जिस प्रकार अग्निकण ईन्धन की महाराशि को भस्म करने में समर्थ है, उसी प्रकार णमोकारमन्त्र चिरसंचित ज्ञानावरणादि कर्मों के समूहरूपी ईन्धन की राशि को क्षणार्द्ध में दग्ध करने में समर्थ है| कल्पवृक्ष, चिन्तामणि रत्न अथवा कामधेनु चिन्तित फलप्रदायक होने से जगत् में पूज्य माने गये हैं| णमोकारमन्त्र चिन्तित और अचिन्तित फलों का प्रदाता होने से उन तीनों से भी अधिक पूज्य है| जिस अज्ञान, पाप और संक्लेशरूपी अन्धकार को सूर्य, चन्द्र अथवा दीपक जैसे ज्योतिर्मयी पदार्थ दूर नहीं कर सकते, उस अन्धकार को इस महामन्त्र का स्मरण अतिशीघ्र दूर कर देता है| अतः इससे अधिक ज्योतिर्मयी कौन हो सकता है ?
इस मन्त्र का स्मरण करने से अनादिकालीन मूर्च्छा भग्न हो जाती है| णमोकारमन्त्र अंग और अंगबाह्य ग्रन्थों का सार है| जिस प्रकार धन की रक्षा के लिये तिजोरी, शरीर की रक्षा के लिये वस्त्र, आरोग्य की रक्षा के लिये औषधि आदि की आवश्यकता हुआ करती है, उसी प्रकार आध्यात्मिक भावों की रक्षा के लिये महामन्त्र की आवश्यकता है| यह सच है कि यह मन्त्र शब्दों से निर्मित है, किन्तु यह अपने आराधक को अशब्द की ओर ले जाता है| जब तक चेतना में चित्रांकित नहीं हो जाता, तब तक ही यह मन्त्र शब्दमयी बना रहता है| यह मन्त्र भक्ति, जप और ध्यान में सामंजस्य स्थापित करता है| संसाररूपी रणक्षेत्र में मोह, राग-द्वेषरूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त करना हो तो साधक के पास णमोकारमन्त्ररूपी अमोघ बाण परमावश्यक हैं| जिस प्रकार जल से शारीरिक मल दूर होते हैं, उसी प्रकार णमोकारमन्त्र से कर्ममल दूर होता है|
 जिस प्रकार धरती में वपन किया गया बीज धरती के रस को चूस कर यथासमय अंकुर के रूप में उत्फुल्लित होता है, उसी प्रकार साधक के मन में बोये गये णमोकारमन्त्र का एक-एक अक्षर आत्मा के चैतन्यामृत का पान कर तेज स्रोत के रूप में प्रकट हो जाता है| गुरु की गुरुता और प्रभु की प्रभुता की प्राप्ति के लिये णमोकारमन्त्र सहायक बनता है|

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