Sunday, 21 August 2011

लक्ष्यपूर्ति ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिये

मनुष्य जैसा लक्ष्य बनाता है, उसी के अनुरूप जीवन की दशा एवं दिशा की संयोजना होती है| यूँ तो मनुष्य पर्याय ही श्रेष्ठता का पर्याय है, फिर भी लक्ष्य निर्धारण कर जीवन को नयी दिशा प्रदान करने वाली पर्याय और अधिक श्रेष्ठ बनती है| लक्ष्य चाहे ईश्‍वर-विषयक हो या ऐश्‍वर्य-विषयक, उसको एकनिष्ठ होकर पूर्ण करना चाहिये| लक्ष्य की दिशा में अपनी समस्त शक्ति और अविकल प्रतिभा का समर्पण होना चाहिये| जिसे प्राप्त करने के लिये मन मचल उठता हो, जिस कार्य की अभिरुचि हो और जो सार्थक व हितकारी हो वही लक्ष्य की श्रेणि में आता है| लक्ष्य का निर्धारण अनिच्छापूर्वक नहीं किया जाता, क्योंकि उसमें उमंग और उत्साह नहीं होने से लक्ष्यसन्धान नहीं हो सकता|
      लक्ष्य-निर्धारण करने के बाद सुदीर्घ प्रयत्न करने पड़ते हैं| जब कोई कार्य किया जाता है तो सफलता या असफलता मिलती है| साधक को सफलता मिलने पर हर्षान्माद और असफलता मिलने पर निराशा में नहीं फँसना चाहिये| निराशा और उदासीनता अकर्मण्य व्यक्ति के सहचर होते हैं, कर्मठ व्यक्ति के नहीं| कर्मठ व्यक्ति अनवरत उद्दाम उमंग और नूतन आशा का शक्तिकेन्द्र होते हैं| लक्ष्य चाहे जितना भी कठिन हो, दृढ़ संकल्प, अटल विश्‍वास और प्रबल पुरुषार्थ से उसे सहज सरल बनाया जा सकता है| जहॉं पर व्यामोह और दुर्बलता का नामोनिशान नहीं होता है, जो लगनशील योद्धा बन कर अविराम प्रयत्न करने की क्षमता दिखाता है, उसे अपने जीवन में अभीष्टप्राप्ति अवश्य होती है| सहायक खोजने की भी आवश्यकता नहीं है, स्वयं का विश्‍वास अटूट हो तो एकाकी भी लक्ष्यप्राप्ति कर सकता है|
      अब तक संसार में अनेक आत्माओं के चरण सफलता ने चूमे है| उनके जीवन का अध्ययन किया जाये तो यह स्पष्ट होता है कि उनकी महानता के पीछे लक्ष्यनिष्ठता है| उनका सम्पूर्ण जीवन लक्ष्य के इर्दगिर्द घूमता हुआ नजर आयेगा| असफलता उन्हें हरा न सकी और कठिनाइयॉं उनके हौसलों को पस्त न कर सकी| असीम धैर्य की पूंजी साथ लेकर वे अपने गन्तव्य की ओर बढ़ते ही चले गये| वस्तुतः जीवन में एक विशिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति के लिये अटल संकल्प, आत्मविश्‍वास, उद्दाम साहस और असीम धैर्य की आवश्यकता हुआ करती है| लक्ष्य के प्रति निज का सर्वस्व उत्सर्ग होना आवश्यक है| लक्ष्यनिष्ठा का सुनिश्‍चित परिणाम निकलता ही है| लक्ष्यनिष्ठ जीवन ही श्रेष्ठ एवं वरेण्य है|

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