Friday, 12 August 2011

मनुष्यजीवन


     मनुष्यजीवन मुक्तिनगर में प्रविष्ट होने का मुख्य प्रवेशद्वार है| इसको प्राप्त करने के लिये सुरेन्द्र, असुरेन्द्र और अहमिन्द्र तक तरसते हैं| इसी महाभवन में सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्ररूपी महाराजा रहते हैं| मोहरूपी दानव ने आत्मा की अगाध गुणराशि का अपहरण कर रखा है, उससे युद्ध कर विजय प्राप्त करने के लिये मनुष्यजीवन से सुन्दर और कोई कुरुक्षेत्र नहीं है| इस जीवन की महिमा अपरम्पार है| मनुष्यजीवन सात राजु प्रमाण ऊँची शिवपुरी को मात्र एक समय में पहुँचाने वाला श्रेष्ठ वायुयान है|
    मनुष्यजीवन अज्ञानरूपी तम को क्षणभर में ही ध्वस्त करने वाला तमहर सहस्रकिरण है| मनुष्यजीवन केवलज्ञानरूपी ज्योति का प्रकाश फैलाने वाला सर्वश्रेष्ठ ऊर्जाघर है| मनुष्यजीवन आधि, व्याधि और उपाधि इन त्रिविध अग्नि में दग्ध होने वाली आत्माओं को अपने शीतल और स्निग्ध जल से शीतलता प्रदान करने वाला मधुर जलयुक्त झरना है| मनुष्यजीवन जन्म, जरा और मरणरूपी रोगत्रय का सफलतापूर्वक निराकरण करने वाला महान औषधालय है| यह जीवाजीवादि सप्त तत्त्व तथा बन्ध और मोक्षमार्ग का बोध कराने वाला महाविद्यालय है|
     यही एक ऐसा उत्तम बन्दरगाह है जहॉं धर्मरूपी वस्तु का क्रय-विक्रय बड़े पैमाने पर होता है| यही अगाध शान्ति प्रदान करने वाला शान्ति निकेतन है| मनुष्यजीवन में ही शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक निधियों की प्राप्ति की जा सकती हैं| जिन्हें अपने आत्मतत्त्व से अगाध प्रेम है और जो परम सौख्य को प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इस जीवन का सार्थक उपयोग करना चाहिये|

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