प्रेम आत्मा की परम पावन अनुभूति है| प्रेम परमार्थसाधना है| प्रेम जीवन का अमृत है| इससे चेतना दिव्य तो ऊर्जा ऊर्ध्वमुखी होती है| अपने समान अन्य आत्माओं को स्वीकार कर सबका सन्मान करना, सबके प्रति निश्चल और निश्छल वात्सल्य वर्षा करना प्रेम का धर्म है| प्रेम अनुत्तर है| समस्त धर्मों का सार प्रेम ही है| जिसने प्रेम को जाना, उसने अध्यात्म के समस्त सारभूत तत्त्वों को जान लिया| मनुष्य मेंं विद्यमान रहने वाले सारे गुण नदियों की तरह है और प्रेम उन सद्गुणों का पुंजीभूत सागर है| प्रेम मन को उदात्त और शरीर को सशक्त बनाता है| प्रेम के कारण वसुधैव कुटुम्बकम् की साधना फलीभूत होती है| आत्मीयता का विस्तार बिना प्रेम के सम्भव नहीं है|
जिस घट में मन में प्रेम नहीं होता, वह घट मन मरघट के समान है| प्रेमज्योति अलौकिक है| इसमें अनुताप नहीं होता, यह झंझावातों से बुझता नहीं है| दिव्य चिन्तामणि रत्न की शीतल कान्ति की तरह स्निग्ध, सन्तापहारी और मनमोहक कान्ति प्रेमदीपक की होती है| प्रेम ऐसा दिव्यमन्त्र है कि वह केवल अपने आश्रय को ही नहीं, अपितु अपनी सन्निधि में आने वाले जीवों को भी निर्मल, शीतल और शान्त बना देता है| प्रेम के बिना सच्चिदानन्दत्व की प्राप्ति असम्भव है|
लोग प्रेम और मोह को एक मानने की भूल करते हैं| मोह जड़ से सम्बन्ध रखता है तो प्रेम चेतन से रिश्ता बनाता है| मोह विभेद कराता है तो प्रेम अभेद में स्थिर करता है| मोह में अन्धत्व होता है तो प्रेम में आत्मवत् सर्वभूतेषु की दिव्यदृष्टि होती है| प्रेम सीमित से असीमित बनने की अनिर्वचनीय साधना है| प्रेम काया है तो मोह छाया है|प्रेम गंगाजल की तरह पवित्र होता है| इसे कहीं भी डालो, पवित्रता का ही निर्माण करता है| उसमें आदर्शों की अविच्छिन्नता जुड़ी रहती है| प्रेम के साथ विवेकशीलता, सुहृदयता, पवित्रता, सदाशयता और वासनारहितता आदि गुणों का गठजोड़ है| प्रेम के कारण मनुष्य की भाव-संवेदनायें नित्य-निरन्तर उच्चस्तरीय आदर्शों के प्रति समर्पित रहती है| प्रेम उम्र, जाति और वैभवादि की सीमा में आबद्ध नहीं होता| प्रेम सूर्य की तरह है| जिस प्रकार सूर्य उदयकाल में मात्र प्राची को ही प्रकाशित करता है, उसी प्रकार प्रेम उदयकाल में इष्टमित्रों का अनुचरण करता है| जिस प्रकार सूर्य मध्याह्नकाल में सारे संसार को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार प्रेम विश्वव्यापी हो जाता है| प्रेम ही मोक्ष का पन्थ है|
No comments:
Post a Comment