Wednesday, 26 October 2011

जैनधर्म और दीपावली

    कार्तिक कृष्णा चतुर्दशी के अपररात्रिक काल में अर्थात् अमावस्या के दिन वर्तमानकालीन चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर को निर्वाणसुख की प्राप्ति हुयी थी| उसी दिन सायंकाल में गणाधिपति इन्द्रभूति अर्थात् गौतम गणधर को केवलज्ञान की प्राप्ति हुयी थी| मनुष्य, विद्याधर और देवों ने इस पावन बेला में दीप जला कर उत्सव मनाया था| आज भी इस अवसर पर जैनलोग उत्सव मनाते हैं| अतः दीपावली जैनपर्व के रूप में विख्यात है|

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