बालाजी नगर में ही वर्षायोग स्थापन विधि 3 जुलाई शाम 6 बजे होगी.
वर्षायोग में आकर अनुयोगों का श्रवण करें.
परम पूज्य चारित्र-चक्रवर्ती, मुनि-कुंजर, आचार्य श्री आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) की विशुद्ध परंपरा के वर्तमान पट्टाचार्य परम पूज्य विद्या-वाचस्पति, तपश्चर्या-चक्रवर्ती, शब्द-शिल्पी, जिनशासन प्रदीप, आकिंचन्य श्रमनेश्वर, आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज ने 5 रस (घी, तेल, नमक, दही, शक्कर) का आजीवन के लिए त्याग कर दिया है.